Saturday, June 25, 2022

रणथम्भोर आगमन पर राजस्थान वन विभाग के मुखिया का किया स्वागत।

रणथम्भोर आगमन पर राजस्थान वन विभाग के मुखिया का किया स्वागत।

 रणथम्भोर आगमन पर राजस्थान वन विभाग के मुखिया हॉफ डॉ. डीएन पांडे जी का आज संस्था पथिक लोक सेवा समिति के सचिव मुकेश सीट, संस्था सदस्य सपना, अंजली, ललित, टिया,  सुरेंद्र आदि ने फोरेस्ट गेस्ट हाउस में जाकर मुलाकात कर त्रिनेत्र गणेश जी महाराज की तस्वीर भेंट की ओर हॉफ साहब को जिले के चौथ का बरवाड़ा से भगवतगढ़ व बोली आदि वन विभाग के क्षेत्र में आने वाले पहाड़ी इलाको में हाइना, जैकाल, लेपर्ड, लोमड़ी वन्यजीवो का विचरण रहता है इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां चालू करने का आग्रह किया जिससे जिले के लोगो को रोजगार के अवसर प्रदान होंगे।

 file photo
                             


Sunday, May 22, 2022

अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर उपवन संरक्षक वन विभाग सवाई माधोपुर व पथिक लोक सेवा समिति के सयुंक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया

अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर उपवन संरक्षक वन विभाग सवाई माधोपुर व पथिक लोक सेवा समिति के सयुंक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया

आज अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर उपवन संरक्षक वन विभाग सवाई माधोपुर व पथिक लोक सेवा समिति के सयुंक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया।




कार्यक्रम की सुरुवात जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ऑला द्वारा जिला कलेक्ट्री परिसर में से रैली को हरी झंडी दिखा कर की गई, रैली बजरिया मैंन मार्केट में से होती हुई महावीर पार्क  में पहुची, पार्क में विभाग व संस्था द्वारा जूनियर व सीनियर वर्ग के स्कूल व कॉलेज के बच्चों की पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला प्रमुख श्रीमती सुदामा मीना, अध्यक्षता नगरपरिषद चैयरमैन विमल महावर विशिष्ट अतिथि उपवन संरक्षक जयराम पांडेय, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डिग्गी प्रसाद मीना व अतिथि संस्था सचिव मुकेश सीट, वन अधिनस्थ कर्मचारी संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जादौन , राजकीय पीजी कॉलेज के व्याख्याता रामलाल बैरवा, अध्यापिका श्रीमती विजयलक्ष्मी अग्रवाल, सेनानिवर्त फौजी हुसेन खान, सेवादल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सलमान रंगरेज, रणथम्भोर स्कूल आर्ट के एम डी परासर व वन विभाग से रेंजर सुरेश गुर्जर, फोरेस्टर ताराचंद व संस्था सदस्य भवानी शंकर, सन्नी वर्मा, ऋषि मीना, सपना जोलिया, सविता शर्मा के अलावा वन कर्मचारी स्कूल के बच्चे व संस्था सदस्य व आमजन मौजूद रहे।



इस अवसर कार्यक्रम का मंच संचालन वन अधीनस्थ कर्मचारी संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र जादौन ने किया। सभी अतिथियों का स्वागत वन अधिकारीयों व संस्था सदस्यो द्वारा किया गया। 


कार्यक्रम की सुरुवात करते हुवे संस्था सचिव मुकेश सीट ने कर्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों,विद्यार्थियों, संस्था सदस्यो व वन कर्मचारियों का स्वागत करते हुवे पर्यावरण संरक्षण के अलावा वन्यजीवो के संरक्षण करने में सभी को धरातल पर योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम में कॉलेज के व्यख्याता राम बैरवा ने जैव विविधता के बारे में संक्षिप्त में जानकारी दी साथ ही युवाओं को ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण के संरक्षण में अपनी अहम जिमेदारी निभाने की अपील की, मुख्य अथिति जिला प्रमुख ने ओर कार्येक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर परिषद चेयरमैन ने ऐसे आयोजन जिले में होते रहे चाहिए इस कार्यक्रम के आयोजक वन विभाग और संस्था को धन्येवाद दिया। और सभी को प्रकति ओर जीव जंतुओं का संरक्षण करने की अपील की, उप वन संरक्षक जयराम पांडे जी ने मानव जीवन मे जैव विविधता को समझते हुवे विस्तार पूर्वक समझाया छोटे बड़े जीवो की कई प्रकार की प्रजातियां होती है जिनका पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, ऑक्सिजन, ग्लोबलवार्मिंग आदि में जैव विविधता के महत्त्व बारे में बताया। मानव जीवन को बचाने के लिए जैव विविधता का संरक्षण करना अति आवश्यक हो गया है।

 
                               

पोस्टर प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में पीजी कॉलेज की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा प्रतिभा गुप्ता द्वितीय स्थान व प्रीति खनगवार प्रथम स्थान ओर जूनियर वर्ग में प्रथम स्थान पर स्टेप बाई स्टेप स्कूल के चिन्मय शर्मा, द्वितीय स्थान शिवांक गुप्ता व तृतीय स्थान कशिश मंगल सिनियर सेकेंड्री कुतलपुरा जाटान रही। सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरुस्कार दिया गया साथ ही रैली में सम्मलित होने वाले सभी विद्यार्थियों व संस्था सदस्यों को भी सांत्वना पुरस्कार दिए गए।




कार्यक्रम के अंत जिला प्रमुख व नगर परिषद चेयरमैन, उप वन संरक्षक संस्था सदस्यों द्वारा संस्था पथिक लोक सेवा समिति का "पक्षी बचाओ परिंडा लगाओ अभियान" की शुरुआत पार्क में परिंडा लगाकर की गई।






Monday, May 16, 2022

रणथंभोर में टाइगर सफारी के दौरान नेचर गाइड व ड्राइवर नहीं कर पाएंगे फोटो व वीडियोग्राफी-

रणथंभोर में टाइगर सफारी के दौरान नेचर गाइड व ड्राइवर नहीं कर पाएंगे फोटो व वीडियोग्राफी-

अब रणथंभोर में टाइगर सफारी के दौरान नेचर गाइड व ड्राइवर नहीं कर पाएंगे फोटो व वीडियोग्राफी-

रणथंभोर बाघ परियोजना में आये दिन एक ना एक वीडियो वाइरल हो रहे है जिसमे गाईड़ ओर ड्राइवरों द्वारा पार्क में नियमों का उलंघन करते हुवे के कई वीडियो वायरल होते है जिससे पार्क की बदनामी होती है और बाघ परियोजना के अधिकारी सवालो के घेरे में आजाते है, हाल ही में एक वीडिय वाईरल हुवा है जिसमे बताया जा रहा है कि बाघ के पीछे जिप्सी को भगाया जा रहा है जिस को देखते हुवे विभाग के कुछ वाहनों, ड्राइवरों ओर गाइडो को कुछ दिन के लिए प्रतिबन्ध किया है। 


आये दिन वीडियो वायरल से हो रही घटनाओं पर प्रतिबिंब लगाने के उद्देश्य से आज दिनांक 16 मार्च 2022 को रणथंभोर बाघ परियोजना पर्यटन के  उप वन संरक्षक  ने कार्यालय आदेश जारी कर रणथंभोर जंगल के सफारी व्हीकल ओनर्स यूनियन एवं रणथंभोर नेचर गाइड एसोसिएशन द्वारा रणथंभोर पार्क में सफारी के दौरान ड्राइवरों का गाइड के द्वारा वीडियो वह फोटोग्राफी लेने में व्यस्त होने के कारण कार्य से ध्यान भटकने के कारण पर्यटकों को सुरक्षित सफारी देने के उद्देश्य से ड्राइवरों व गाइडों के द्वारा सफारी के दौरान मोबाइल एवं कैमरे से वीडियो एंड फोटोग्राफी बंद करने हेतु आदेश जारी किय गये है 


जिससे पर्यटकों को सुरक्षित सफारी देने के उद्देश्य से ड्राइवरों को गाइडों के द्वारा सफारी के दौरान मोबाइल कैमरा वीडियो फोटोग्राफी करना प्रतिबंध किया गया है ड्राइवरों एवं गाइड द्वारा पार्क में सफारी के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Sunday, May 15, 2022

रणथम्भोर बाघ परियोजना के बदलाव की कहानी है-

रणथम्भोर बाघ परियोजना के बदलाव की कहानी है-

रणथंभौर की विभागिय टीम द्वारा बाघो व अन्य वन्यजीवो के संरक्षण मे इस वर्ष बेहतरीन कार्ये किये गए-

रणथम्भोर बाघ परियोजना के बदलाव की कहानी है-

पहली बार टाइगर रिजर्व में पानी के व्याप्त व्यवस्थाओ के ये सोलर की व्याप्त व्यवस्था, टाइगर प्रोटेक्शन व कंजर्वेशन के लिए 9 चौकियां ओर बॉडर होमगार्ड्स की व्यवस्था आदि के काम होते दिख रहे है और इनके अलावा किसी भी टाइगर रिजर्व के लिए सब से अहम जरूरी होती है उसकी जीवन रेखा, पेराफेरी प्रोटेक्शन रोड व रोज टाइगर की रिपोर्टिंग । 


जिस कोर एरिया में सर्वाधिक बाघ हैं और जहां से लगातार बाघ गायब होने की घटनाएं होती रही है वहा की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रोटक्शन रॉड बनाई गई और सभी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। स्टाफ के रहने के लिए बेहतरीन सुविधाओं युक्त चौकिया बनाई गई है कुछ एक का निमार्ण कार्ये प्रगर्ति पर है। 



अवैध घुसपैठ पर अंकुश लगता देख कुछ एक छोटे मोटे व्यवधान उत्तपन्न हुवे जिसे कुछ निर्माणाधीन काम रुक गए तो कुछ पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कर पुलिस सुरक्षा के बीच कामो को पूरा किया जा रहा हैं।


4 सर्वाधिक बाघ व अन्य वन्यजीवो वाली रेंजों में 70 कि.मि पेट्रोलिंग ट्रैक  व 12 चोकिया बनाई गई हैं। पहले इन पेरिफेरी पर सुरक्षा का कोई पुख़्ता बंदोबस्त नही था ना चौकीयो का तो नामोनिशान था और ना ही स्टाफ को गश्त करने के किसी प्रकार का कोई ट्रेक था। 

इसलिए पहले सुरक्षा दीवार के पेरिफेरी के रास्तों से अवैध गतिविधियां, अवैध घुसपैठ व शिकार जैसी कहि घटनाएं घटित होती रही थी। कभी कबार विभाग को सूचना लगती थी तो विभाग के वन कर्मियों के पास जंगल के बीच से होकर उन तक पहुंचने के रास्ते नहीं मिलते थे। 


मिर्जाघाटी एरिया में  वर्ष 2021 दिसम्बर माह में एक चिंकारा के शिकार की घटना हुई थी जिसमे शिकारी चिंकारा को मारकर ले जा रहे थे। जब तक विभाग के वन कर्मियों की टीम फेरफेरी से बाहर आबादी वाले एरिया से मोके पर पहुची तब तक शिकारी भाग चुके थे। इसे पहले भी बंदूकधारी शिकारी चीतल के कटे धड़ को ले जाते हुए ट्रैप कैमरे में दिखाई दिए थे, हर बार जीवन रेखा सड़क, पर्याप्त चौकिया, व स्टाफ के अभाव में यही होता रहा है शिकारी शिकार कर के हमेशा गायब हो जाता था क्योंकि जंगल में 15-20 किलोमीटर भीतर के पीएफेरी में  घुसपैठ रोकने के लिए कोई स्टाफ, चौकी, रास्ते मौजूद नहीं थे। 


हाल ही में किये गये सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के कार्यों को ओर आगे बढ़ाते हुवे सवाई मानसिंह अभ्यारण फलौदी वाले 636 वर्ग कि.मी तक ले जाना है।


जिससे टाइगर ओर अन्य वन्यजीवो को एक बड़ा एरिया मिलेगा, साथ ही अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण होने से पेरिफैरी एरिया में फिर से हरा भरा जंगल डवलप होगा ओर सभी प्रकार की अवैध घटनाएं रूकेंगे।

Friday, May 13, 2022

13 वर्षीय बाघिन टी-61 की मौत, राजबाग वन चौकी पर किया अंतिम संस्कार

13 वर्षीय बाघिन टी-61 की मौत, राजबाग वन चौकी पर किया अंतिम संस्कार

 रणथंभोर - 13 वर्षीय बाघिन टी-61 की मौत, राजबाग वन चौकी पर किया अंतिम संस्कार



रणथंबोर की बाघिन टी 61 की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार राजबाग वन चौकी पर किया गया। मिली जानकारी के अनुसार रणथंबोर की बाघिन टी 61 जोन नम्बर 7 के जामोदा नाले में मृत अवस्था में पाई गई। सूचना पर वन विभाग की टीम ने मृत बाघिन को अपने कब्जे में लिया साथ ही आसपास से नमूने लिए जिससे कि बाघिन की मौत की पुष्टि हो सके। आसपास कोई भी मृत पालतू जानवर या अन्य कोई जंगली जानवर नहीं पाया गया। वन विभाग के पशु चिकित्सको के अनुसार बाघिन का मृत शरीर 2-3 दिन पुराना बताया जा रहा है।

 टी - 61 बाघिन की मौत के मामले में पूरी तरह से अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से मौत की पुष्टि हो पाएगी। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार गर्दन और एक साइड की हड्डी टूटने की वजह से उसकी मौत होना बताया जा रहा है।



 बाघिन टी - 61 ने 2 शावकों को जन्म दिया था  मृत बाघिन टी - 8 लाड़ली व टी 34 कुंबा की बेटी थी 

 बाघिन  टी - 61 का मूवमेंट ज्यादातर रणथंबोर के जॉन नंबर 7 में रहता था। बाघिन टी - 61 नरम स्वभाव की थी,  एवं रणथंभोर भ्रमण पर  आने वाले पर्यटकों को कई बार अठखेलियां करती हुई नजर आती थी। 


 बाघिन टी - 61 की मौत के बाद विभाग के अधिकारी मुख्य वन संरक्षक शेडू राम यादव, उप वन संरक्षक महेंद्र शर्मा, सहायक उप वन संरक्षक फलोदी रेंज मानसिंह, फलोदी रेंजर राजबहादुर, खंडार रेंजर विष्णु गुप्ता, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ राजीव गर्ग, रणथंभोर पशु चिकित्सक डॉ सीपी मीणा तहसीलदार प्रीति मीणा, एनजीओ के प्रतिनिधि, पत्रकार सहित विभाग के कर्मचारियों की मोजुदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

Wednesday, May 11, 2022

 रणथम्भौर में नए जोन खुलने से पर्यटकों का होगा इजाफा, रोजगार के भी बढ़ेगे अवसर 

रणथम्भौर में हर साल देसी विदेशी पर्यटकों पर्यटकों का इजाफा हो रहा है लेकिन विभाग की ओर से रणथम्भौर के बाहरी इलाके में नए और जोन खोले जाते तो रणथम्भौर पर्यटन में ओर अधिक इजाफा होगा साथ ही रोजगार के नए अवसरों में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा रणथम्भौर के बाहरी इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही शूरू होने से बाहरी सीमा वाले इलाकों में कटाई, चराई आदि अवैघ गतिविधियों पर भी अंकुश लग सकता है। साथ ही रणथम्भौर के मुख्य जोनो से पर्यटकों का दबाव भी कम होगा।  


2008 तक रणथम्भौर में 5 जोन थे वन विभाग के अनुसार रणथम्भौर में 2008-09 तक महज पांच ही जोन थे। इसके बाद वन विभाग की ओर से रणथम्भौर में 6 से 8 तक तीन नए जोन बनाए गए। उसके बाद रणथम्भौर में 9 एवं 10 दो जोन शूरू किया गया। उसके बाद अभी तक 14 साल बीतने के बाद भी अब तक रणथम्भौर में एक भी नया जोन शूरू नहीं किया गया है। 

पूर्व में रणथम्भौर के बाहरी जोनों में वाहनों की लिमिट निर्धारित नहीं थी लेकिन करीब पांच साल पहले वन विभाग ने नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी (एनटीसीए) गाइडलाइन का हवाला देकर रणथम्भौर के बाहरी जोनो में भी पर्यटन वाहनों की लिमिट निर्धारित कर दी। 

पर्यटक गाइड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 25 मई तक इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करें।

पर्यटक गाइड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 25 मई तक इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करें।

पर्यटक गाइड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 25 मई तक इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करें।



राजस्थान पर्यटन व्यवसाय सुकरकरण और विनियमन अधिनियम, 2010 की धारा 8 की उप धारा (1) के अनुसार गाइडों के अनुज्ञापन के लिए जारी राजस्थान पर्यटन व्यवसाय नियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार 5 हजार स्थानीय स्तर पर एवं एक हजार राज्य स्तर के पर्यटक गाइडों के चयन के लिए आयोजित की जाने वाली गाइड शिक्षण पाठयक्रम में प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए इच्छुक आवेदकों से 25 मई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं।

पर्यटक स्वागत केंद्र सवाई माधोपुर के सहायक निदेशक मधुसूदन ने बताया कि राज्य स्तर गाइड शिक्षण के लिए निर्धारित एक हजार सीटों के लिए वे अभ्यर्थी जिन्होंने अपनी आयु एक अप्रैल 2022 को 21 वर्ष पूर्ण कर ली हो और 50 वर्ष की आयु से कम हो एवं भारत के विधि द्वारा स्थापति किसी विशविद्यालय से स्नातक या भारत में विधि द्वारा स्थापित किसी विशविद्यालय या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए अनुमोदित किसी संस्था से पर्यटन में 3  वर्ष डिप्लोमा धारक हो।



इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर गाइड प्रशिक्षण के लिए निर्धारित पांच हजार सीटों के लिए जिन अभ्यर्थियों ने एक अप्रैल 2022 को 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो और 50 वर्ष की आयु से कम हो परन्तु 10 वर्ष का गाइड का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों की ऊपरी आयु सीमा 55 वर्ष तक हो सकती है। अभ्यर्थी भारत में विधि द्वारा स्थापित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सैकेण्डरी परीक्षा या 10वीं परीक्षा उत्तीर्ण हो यदि किसी के पास 10 वर्ष से अधिक की गाइडिंग का अनुभव है और वह वन विभाग/पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग/अन्य सरकारी उपक्रम/विभाग या निजी न्यासों द्वारा चलाये जा रहे ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों द्वारा जारी परिचय-पत्र/अनुज्ञप्ति कार्ड रखता है तो ऐसे अभ्यर्थी को सैकण्डरी परीक्षा या 10वीं उत्तीर्ण की अर्हता में शिथिलन देय होगा।

आवेदन कैसे करेः- अभ्यर्थी अपना आवेदन www.tourism.rajasthan.gov.in तथा https://www.ihmjaipur.com वेबसाइट पर दिये गये लिंक https://www.rajguidetraining2022.in के माध्यम से ऑनलाइन भर सकते हैं।

आवेदन शुल्कः- पर्यटक स्वागत केन्द्र के सहायक निदेशक ने बताया कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 500 रूपए, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 250 रूपए, दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आवेदन करने वाले आवेदकों को क्रमश एक हजार रूपए (सामान्य वर्ग) एवं 500 रूपए (आरक्षित वर्ग) के लिए आवेदन शुल्क देय होगा।

Thursday, May 05, 2022

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) का किया गया स्वागत

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) का किया गया स्वागत

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) का किया गया स्वागत

सवाई माधोपुर, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) एमएल मीना का सवाई माधोपुर से गुजरात प्रदेश मुख्यालय   पर स्थानांतरित होने पर सिटी सेंटर में स्थित पथिक लोक सेवा समिति कार्यालय में विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

Photo- NGO office


कार्यक्रम में जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) एमएल मीना को संस्था सदस्यों द्वारा माला एवं साफा पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया गया। 




इस अवसर पर उन्होंने नाबार्ड द्वारा किए जाने वाले कई कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नाबार्ड के द्वारा महिला एवं पुरुषों को कई प्रकार की योजनाओं की जानकारी एवं उनकी ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के बाद लोग स्वयं का रोजगार भी खोल सकते हैं। इसकी वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। साथ ही उन्होंने संस्था सद्स्यों से अपील करते हुए कहा आज का युवा वर्ग नौकरी की तलाश में रहता है। नौकरी नहीं मिलने पर अवसाद में रहता है ऐसे में लोगों को नाबार्ड द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग लेकर स्वयं का रोजगार चलाने की कोशिश करना चाहिए।


इस मौके पर एमएल मीना की जगह डीडीएम पद पर पदस्थापित हुए पुनीत शर्मा का भी संस्था सदस्यों द्वारा स्वागत किया गया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि नाबार्ड से संबंधित जो भी योजनाएं हैं उनकी जानकारी जन जन को होनी चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा हो सके। 




इस मौके पर उन्होंने एवं सभी संस्था सदस्यों ने एक दूसरे का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्था सचिव मुकेश सीट, संस्था सदस्य विजय मीना, रेखा मीना, अब्दुल गफ्फार, सनी वर्मा, शिवानी राणावत, सपना जोलिया, टीना, भारती राही, विशाल , विरेन जैन, जय लक्ष्मी कुमावत सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।


Saturday, April 30, 2022

Shri Seduram Yadav (IFS) took charge of the post of Chief Conservator of Forests and Regional Director Ranthambore Tiger Project-

Shri Seduram Yadav (IFS) took charge of the post of Chief Conservator of Forests and Regional Director Ranthambore Tiger Project-

Shri Seduram Yadav (IFS) took charge of the post of Chief Conservator of Forests and Regional Director Ranthambore Tiger Project-

From the post of Chief
Conservator of For
ests and Regional Director Ranthambore
Tiger Project, Shri
T.C. Verma ji retired today and in his place Shri Seduram Yadav ji (IFS) took
additional charge. After after charging..

Photo;- T.C. Verma (IFS) & Shri Seduram Yadav ji (IFS)

the secretary of the Pathik lok
seva samiti, Mukesh Siit, and the members of the organization Virendra Jain,
Salman Rangrej etc. welcomed and greeted them by wearing garlands and giving

mementos
.



 




On this occasion, Chief
Conservator of Forest Forest Department (ccf) Kota Shri Manoj Parasar ji,
Deputy Conservator of Forest RTR Shri Mahendra Sharma ji, DFO Forest Department
Shri Jairam Pandey ji, DFO Chambal Ghariyal Shri Anil Yadav ji, Deputy
Conservator of Forest Tourism Shri Sandeep Chaudhary ji, Deputy Conservator of
Forests Shri Sanjeev Sharma ji etc. were present.

Secretary of the Pathik lok seva samiti, Mukesh Siit & Shri Seduram Yadav (IFS) 

Thursday, April 21, 2022

 वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले का किया विरोध -

वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले का किया विरोध -


 वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले का किया विरोध 

सवाई माधोपुर- रणथम्भौर में वनपाल का तबादले का मामला विवादों के घेरे में आ रहा है। राजस्थान वन अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले पर नाराजगी जताते हुए निन्दा की है। रणथम्भौर के कुण्डेरा रेंज के भदलाव नाके पर मुकेष गुर्जर वनपाल के पद पर कार्यरत थे। पिछले दिनों उनका तबादला कर उन्हें फलाइंग रेंज में लगाया गया। इसको लेकर वन कर्मचारी संघ के प्रदेष अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह जादौन का कहना हैं कि अवैध खनन पर कार्यवाही करना लोकसेवक का फर्ज है। जबकि एक राजनेता ने वनपाल का तबादला करवा दिया। पहले षिकायत की जांच करानी चाहिए। 


Wednesday, April 20, 2022

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा "हमारी लाडो" के तहत 25 बेटियों को करवाया रणथम्भौर का शैक्षिक भ्रमण-

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा "हमारी लाडो" के तहत 25 बेटियों को करवाया रणथम्भौर का शैक्षिक भ्रमण-

संस्था द्वारा "हमारी लाडो" के तहत 25 बेटियों को करवाया रणथम्भौर का शैक्षिक भ्रमण-


आज संस्था पथिक लोक सेवा समिति के तत्वावधान में मिसेज एशिया इंडिया एवं हमारी लाडो की ब्रांड एम्बेसिडर सीमा मीना सहित काॅलेज की 25 बेटियों को प्रातःकालीन सफारी में  रणथम्भौर के जोन नम्बर 3 का भ्रमण करवाया गया। 

FILE PHOTO-1


इस मौके पर मिसेज एशिया एण्डिया सीमा मीना ने बताया कि वन व वन्य जीवों के संरक्षण के उद्देश्य से बेटियों को भ्रमण करवाया जहां पर उन्होंने टाइगर टी-120 की अठखेलियां देखी साथ ही चीतल, सांभर, हीरण सहित अन्य कई प्रकार के पेड पौधों व पक्षियों को देखकर काफी उत्साहित हुई। 

इस मौके पर नेचर गाइड मानसिंह राजावत ने बेटियों को रणथम्भौर फोर्ट का इतिहास, गणेश मंदिर का इतिहास, टाइगर प्रोजेक्ट एवं वन व वन्य जीवों के बारे में जानकारी दी। 

PATHIK FILE PHOTO-2

रणथम्भौर भ्रमण के बाद काॅलेज की सभी बेटियों को संस्था कार्यालय पर मिसेज एशिया इंडिया द्वारा समाज में फेली बुराईयों, कुरूतियों एवं समाज में हम अपना योगदान कैसे करें उस बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारी दी। इस मौके पर एमएससी की छात्रा पूजा मीना ने भी संबोधित करते हुए बताया कि आज का शैक्षिक भ्रमण में हमने प्रकृति द्वारा हमें कैसे आक्सीजन मिलती है साथ ही अन्य कई प्रकार के वन व वन्यजीवों को करीब से देखा और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। 

PATHIK FILE PHOTO-3

वहीं बीए अंतिम वर्ष की छात्रा भारती जोलिया ने बताया कि इस संस्था से जुडकर हमने वन व वन्य जीवों के बारे में बहुत कुछ सीखा है। आज के इस शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम में रणथम्भौर के उपवन संरक्षक महेंद्र शर्मा, एसीएफ संजिव शर्मा एवं संस्था सदस्य विजय मीना, सन्नी वर्मा, सपना जोलिया, टीना, रेखा मीना, आशाराम, सीताराम आदि का अहम योगदान रहा।  

संस्था पीछे 8 वर्षो से यहां के युवाओ और लोगो को रणथम्भोरे के बाघों और यहां के वन्यजीवो के प्रति जागरूक करने का काम करती आरही है।


Wednesday, April 13, 2022

 रणथम्भौर में अधिकारियों की नाक के नीचे फिल्म व डाॅक्यूमेंट्री की हो रही  सूटिंग

रणथम्भौर में अधिकारियों की नाक के नीचे फिल्म व डाॅक्यूमेंट्री की हो रही सूटिंग

 रणथम्भौर में अधिकारियों की नाक के नीचे फिल्म व डाॅक्यूमेंट्री की हो रही  सूटिंग

सवाई माधोेपुर- रणथम्भौर अभ्यारण में एक ओर नेषनल टाइगर कनजर्वेषन अथाॅरिटी एनटीसीए की गाइड लाइन का हवाला देकर पर्यटन वाहनों की संख्या को सीमित किया जा रहा है। वहीं दूसरी और वन विभाग की नाक के नीचे रणथम्भौर अभ्यारण में फिल्म व डाॅक्यूमेंट्री के नाम पर वन अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआाम धज्जियां उड़ाई जा रही है। वर्तमान में रणथम्भौर में कई कंपनियां डाॅक्यूमेंट्री फिल्मों कीष्षूटिंग कर रही है। ष्षूटिंग के दौरान ष्षूटिंग की टीम जंगल में जिप्सी के कांच गिराकर, सीटें खोलकर और जिप्सी में क्रेन कैमरा लगाकर ष्षूटिंग कर रहे हैं। इससे वन्य जीवों के जीवन में दखल पड़ रहा है। 



क्रेन कैमरा लगाना प्रतिबंधित- वन विभाग के अनुसार जंगल में भ्रमण के दौरान और डाॅक्यूमेंट्री सूटिंग के दौरान जिप्सी के कांच गिराना, सीटें खोलना, और जिप्सी पर क्रेन कैमरा लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। ऐसा करते पाए जाने पर जिप्सी पर प्रतिबंध, ष्षूटिंग को बंद करने और जुर्माना लगाने के प्रावधान हैं। इसके बाद भी रणथम्भौर अभ्यारण में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर सूटिंग की जा रही है। वहीं टाइगर के फुटेज लेने के लिए जिप्सी संचालक भी जिप्सी को बाधों के बिल्कुल करीब ले जाते हैं। ऐसे में हादसा होने की पूरी पूरी संभावना रहती है। 

वहीं इस पूरे मामले पर रणथम्भौर बाघ परियोजना सवाई माधोपुर के महेन्द्र शर्मा ने कहा कि रणथम्भौर में कई डाॅक्यूमेंट्री सूटिंग की जा रही है। सूटिंग के दौरान नियमों की अवहेलना की जानकारी नहीं है। ना ही इस संबंध में हमें कोई शिकायत मिली। फिर भी मामले जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।  


 घर में घुसे भालू को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू

घर में घुसे भालू को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू

 घर में घुसे भालू को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू 

सवाई माधोपुर-नीमली रोड स्थित तिलक नगर में भालू के घर में घूसने से लोगों में हडकंप मच गया और लोग भालू के डर से घर से बाहर निकल आए। सूचना पर पहंुची वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने घर में घुसे भालू को रेस्क्यू किया। वन विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार नीमली रोड स्थित तिलक नगर में भालू के मूवमेंट होने की सूचना मिली थी। सूचना के बाद से ही वन विभाग की टीम भालू की माॅनिटरिंग व ट्रैकिंग में जूटी हुई थी। मंगलवार षाम को विभाग की टीम को एक घर में भालू नजर आया तो टीम के सभी सदस्यों ने भालू को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया। इस मौके पर वन विभाग के पषु चिकित्सक डाॅ सीपी मीना के अनुसार भालू के किसी वाहन की टक्कर से घायल होने की आषंका है। भालू के षरीर पर पहले से कुछ गहरे घाव थे। ऐसे में विभाग की टीम ने भालू को वातानुकुलित एंबुलेस में रखकर उपचार किया। इस मौके पर विभाग की रेेस्क्यू टीम से जीत सिंह खंगार, फरहान खान, बालकिषन, जसकरण सहित अन्य कई सदस्य थे।



Wednesday, September 15, 2021

वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच संघर्ष को रोकने में बनेगी मददगार पुस्तक प्रकाशित

वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच संघर्ष को रोकने में बनेगी मददगार पुस्तक प्रकाशित



उदयपुर, 15 सितंबर। वर्तमान में वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच बढ़ रहे संघर्ष एवं आये दिन हो रही घटनाओं को देखते हुए वन्यजीवों के उचित संरक्षण के साथ उन्हें उपयुक्त व अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ‘वन्यप्राणी बचाव एवं पुनर्वास‘ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी गई है। यह पुस्तक उदयपुर के ख्यातनाम पर्यावरणविद् एवं वन विभाग के सेवानिवृत अधिकारी डॉ.सतीश कुमार शर्मा ने लिखी है।

डॉ शर्मा के अनुसार प्राकृतिक आवासों में तरह-तरह के मानवीय व्यवधान कई जगह वन्य प्राणियों को अपना प्राकृतिक आवास छोड़कर भटकने पर मजबूर कर रहे हैं। भटकते ये प्राणी कई बार मानवीय आबादियों, खेतों, सड़कों, रेलवे लाइनों, औद्योगिक परिसरों आदि विषम जगहों पर पहुंच जाते हैं तथा कई बार वहां किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो कई बार स्वयं दुर्घटना का कारण भी बन जाते हैं। 

इन परिस्थितियों में जनधन की हानि रोकने एवं वन्य प्राणियों को संकट से निकालने हेतु त्वरित बचाव एवं पुनर्वास कार्यों की जिम्मेदारी वन विभाग पर आ जाती है। उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए इस जिम्मेदारी को कुशलता से शीघ्रता एवं सुरक्षा पूर्वक पूर्ण करने की व्यावहारिक विधियों की विस्तृत जानकारी इस पुस्तक में समाहित है जो वन विभाग एवं वन्य प्राणी सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थाओं की क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

वन्यजीवों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए उपयोगी
विश्व प्रकृति निधि भारत के सीईओ रवि सिंह ने इस पुस्तक का आमुख लिखते  हुए इसे वन्यजीव संरक्षण एवं वन्यजीवों के पुनर्वास के लिए उपयोगी बताया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों को उनके व्यवहार के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है तभी मानव एवं वन्यजीवों के बीच संघर्ष को समाप्त किया जा सकता है।

119 रियल रेसक्यू के अनुभव शामिल
डॉ सतीश शर्मा ने बताया कि इस पुस्तक में 119 वास्तविक रेस्क्यू ऑपरेशन के अनुभव को भी स्थान दिया गया है। इसके तहत चिडि़या घरों के 13, स्तनधारियों के 32, पैंथर के 34, टाइगर के 8,  पक्षियों के 9, सरीसृपों  के 23 रेस्क्यू ऑपरेशन का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि इन रेस्क्यू ऑपरेशन में किस तरह की सावधानियां बरती जानी चाहिए।




36 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव

डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने वन विभाग राजस्थान में 36 वर्षों से अधिक राजकीय सेवा प्रदान की है। इस दौरान श्रेष्ठ अनुसंधान, लेखन, वानिकी विकास एवं वन्य जीव संरक्षण प्रबंधन कार्यों पर डॉ गोरख प्रसाद पुरस्कार 1986, अखिल भारतीय वानिकी पुरस्कार 1990, वन पालक पुरस्कार 1995, वानिकी लेखन पुरस्कार 1996, विज्ञान वाचस्पति 1997, डॉ. सलीम अली वन्यजीव राष्ट्रीय फेलोशिप 1997, इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्षमित्र पुरस्कार 1998, मेदिनी पुरस्कार 1999 व 2006, इंडियन फॉरेस्ट अवॉर्ड 1999, डॉ. रतन कुमारी पदक 2000, राजस्थान सिविल सेवा पुरस्कार 2013 मिर्जा राजा राम सिंह पुरस्कार 2014, सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ माइंस एण्ड रिसर्च उदयपुर द्वारा प्रदत लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2019, जाइश वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन अवॉर्ड 2019, टाइगर वॉच सवाई माधोपुर द्वारा प्रदत ‘‘द सुजान राजस्थान लाइफ टाइम वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन अवॉर्ड 2020 आदि प्राप्त हुए।

डॉ. शर्मा ‘‘आर्निथोबॉटनी ऑफ इंडियन वीवर बर्ड‘‘, ‘‘लोक प्राणी विज्ञान‘‘, ‘‘वन्यजीव प्रबंधन‘‘, ‘‘आर्किड्स ऑफ डेजर्ट एण्ड सेमी एरिड बायोजियोग्राफिक जोन्स ऑफ इंडिया‘‘, ‘‘वन्य प्राणी प्रबंधन एवं पशु चिकित्सक‘‘, ‘‘फौनल एण्ड फलोरल एंडेमिन्स इन राजस्थान‘‘, ‘‘ट्रेडीशनल टैक्निक्स यूज्ड टू प्रोजेक्ट फॉर्म एंड फॉरेस्ट्स इन इंडिया‘‘, ‘‘वन विकास एवं पारिस्थितिकी‘‘ वन पौधशालारू स्थापना एवं प्रबंधन‘‘  एवं ‘‘जैव विविधता संरक्षण‘‘ नामक पुस्तकों के प्रणेता रहे। इनके 640 से अधिक लोकप्रिय एवं वैज्ञानिक लेख हिन्दी व अंग्रेजी भाषा के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अनुसंधान journal में प्रकाशित हो चुके है।

Monday, September 13, 2021

MP model to be applied in Tiger Estimation-2022

MP model to be applied in Tiger Estimation-2022


Jaipur:- Madhypradesh's neighboring states will now apply MP model in the estimation of Tigers, Rajasthan, and Maharashtra already working on the project as per sources.

This time there will be a paperless estimation of Tigers during All India Tiger Estimation-2022, forest staff is being trained on a regular basis and this time Master Trainers are Junior Officers instead of Senior Officers. 

All the information regarding animals will be uploaded Online, the estimation will be carried out in 4 categories, in category 1st pugmarks, scats and starch marks on trees will be noted down to know the presence of the animal. in second category (WII) Dehradun scientists will study the satellite imagery data of the area. In third category, camera trap images will be taken and then the pictures will be scientifically compared. In 4th category, population estimation will be carried out for the Tigers who are inside the Tiger Reserves.

MP is known as both Tiger State and Leopard State as well, the data which will be collected will be uploaded to a mobile app and finally will reach to the Scientists of WII. Wildlife Institute of India, WWF and Forest Department Expert Officials have this time given training to Master Trainers and then the Master Trainers will train other staff at various levels.

There is already a commitment to increase the Global Tiger Population by 2022. How far is Rajasthan, right now current population of tigers in the State is just over 100, and this viable 100+ figure reached only in 2021? On the other side tiger population estimation of MP in 2018 was 526 tigers which is almost 20% population of India's wild tigers.

Rajasthan also in the past 10 years faced the worse Tiger Management, more than 45 tigers disappeared and Nobody knows where they've gone? A Tiger MT-1 disappeared from right under the noses of monitoring staff and from inside the 80 square kilometer enclosure. 

Madhyapradesh also has more than 6 Tiger Reserves while Rajasthan has only 3, 4th one Ramgarh is not yet notified, while places and rich forest belts like Kumbhalgarh are kept aside, fortunately now they are taking care of Kumbhalgrah also whose proposed area is huge 1955 square kilometer. 

It will be worth watching how they will conduct Tiger Estimation for 2022.


टाइगर रिज़र्व की महिला वनकर्मी को धमकाने का मामला

टाइगर रिज़र्व की महिला वनकर्मी को धमकाने का मामला


कोटा:- मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व में एक नाव संचालक ठेकेदार द्वारा महिला वनकर्मी को धमकाए जाने का मामला सामने आया है। 

रिज़र्व में नाव संचालन हेतु, सीसीएफ ऑफिस के पास तैनात महिला फारेस्ट गर्द जेठी इंचार्ज को ठेकेदार, बनवारी यदुवंशी, तुषार यदुवंशी एवं नरेंद्र यदुवंशी नें डराया व धमकाया जिसके बाद महिला फारेस्ट गार्ड नें किशोरपुरा थाने में लिखित में मुकदमा दर्ज करवाया। 

घटना 15 दिन पुरानी बताई जा रही लेकिन वन द्वारा अभीतक उक्त ठेकेदार एवं उसके साथियों पर कोई पुख़्ता कार्यवाई नहीं की गई है वहीं पुलिस द्वारा भी उक्त मामले में अभी तक ठेकेदार को गिरफ्तार कर पुछताछ नहीं की गई है।

वहीं घटनाक्रम को लेकर वन्यजीव प्रेमियों एवं वन कर्मचारियों के संगठन में खासा आक्रोश है। उक्त मामले को लेकर वन्यजीव एक्टिविस्ट अनिल रोजर्स उदयपुर, बाबू लाल जाजू भिलवाड़ा, जीव रक्षा संस्था, बीकानेर, पथिक लोक सेवा समिति, सवाई माधोपुर, राजस्थान अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ नें अपनी आपत्ति दर्ज करवाई है। 

गौरतलब है बनवारी एवं इसके साथियों पर मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व में घुसकर रात में सर्च लाइट डाल पैंथर जैसे वन्यजीवों को परेशान करने का भी आरोप है वहीं इसके व इसके साथियों के खिलाफ कई शिकायतें वन विभाग में आला अधिकारियों को दर्ज करवाई जा चुकी है। इसके बावज़ूद महिला वनकर्मी को डराने और धमकाने जैसे गंभीर मामलों पर कोई पुख़्ता कार्यवाई अभी तक नहीं होना सम्बंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। 

मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व में बाघों का पुनर्वास एक तरह से फेल हो गया था, यहां या तो अधिकांश बाघ मर गए या लापता हो गए, अवैध सफ़ारी भी मुकुंदरा की बड़ी समस्याओं में से रही है, वहीं गांवों का स्वेच्छिक विस्थापन न हो पाना आदि समस्याएं भी मुकुंदरा के विकास के सामने बाधा बनकर खड़ी हैं। उसके साथ ही मुकुंदरा फारेस्ट स्टाफ की कमी से भी झूझ रहा है। ऐसे में ठेकेदारों द्वारा एक महिला वनकर्मी को डराया धमकाया जाना किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है। 

राजस्थान के सभी वन्यजीव प्रेमियों एवं वन विभाग के कर्मचारी संगठनों की पुरज़ोर मांग है कि ऐसे आपराधिक तत्वों पर जल्द से जल्द कार्यवाई कर प्रदेश की जनता के सामने नज़ीर पेश करें।


Saturday, September 04, 2021

Palighat a wonderful place to see Aquatic fauna

Palighat a wonderful place to see Aquatic fauna


Ranthambhore, 4 Sept: Neighboring Ranthambhore National Park and under National Chambal Ghariyal Sanctuary Palighat is a wonderful place where you can see Ghariyal, Crocodiles, Turtles and and many Aquatic birds.

Ghariyal is a critically endangered species which can be seen in specific parts of Chambal River in Rajasthan, and after Dhaulpur, Palighat is the most popular place where one can easily see Ghariyals in their natural habitat.

Other species is Indian Marsh Crocodile which is though common but it's worth watching them basking in the sun on the sandy shores of Chambal and Parwati River. 

There are basically 8 number of turtles 4 softshell and 4 hard shell found in Chambal Ghariyal Sanctuary, namely red crowned roofed turtle, three striped roofed turtle, crowned river turtle, Indian tent turtle (all hard shell turtles), while Indian narrow headed softshell turtle, Indian softshell turtle, Indian flapshell turtle, Indian peacock softshell turtle (all are soft shell turtles) in which Indian narrow headed or Chitra indica is the largest.

Many aquatic birds and waders are also found here both resident and migratory.

The main threat to their habitat is illegal sand excavation, most of these species lay their eggs in sand and when people illegally extract sand the nest of these animals and birds gets destroyed.

Chambal is home to another elusive creature Smooth Coated Otter, these are also known as wolves of the river and aren't afraid of having small conflicts with  crocodiles even. Smooth coated otter is listed as vulnerable under IUCN (International Union for Conservation of Nature)

And if you move further to Dhaulpur area there is chance that you can see Critically Endangered Gangetic River Dolphin. A very small population of Gangetic River Dolphin exists in Rajasthan.

In evening and early morning there are chances of watching Fox and Jackal playing and wandering in search of food. 

Indian Skimmer is always on the wishlist of Birders and Chambal provides you ample of opportunity to record this bird.

River lapwing a Near Threatened species will amaze you on the shores of Chambal. Altogether it's a adventurous experience to visit Chambal and especially Palighat and Dholpur whenever you're on vist to Ranthambhore. 

MHTR has the largest active nesting site of Indian Vulture

MHTR has the largest active nesting site of Indian Vulture


Kota, Bundi, Jhalawar, and Chittorgarh 4 Sept: Today is the International vulture awareness day, and if we talk about Tiger Reserves, MHTR leads the chart. 

The Ravines of Chambal are one of the largest active nesting sties of Indian Vulture in South Asia, also here you can see Egyptian Vulture, White Rumped Vulture, King or Red Headed Vulture and Sometimes Migratory Eurasian Griffon and Himalayan Griffon. 

In Kota Gapernath of Borabas Range and Gradiya Mahadev of Jawahar Sagar Range are the best places to see vultures. 

While in Jhalawar just adjoining territorial Gagron Range there is cliff named as Gidhh Karai (Means Ravine of Vultures), this the active nesting site of Vultures in Jhalawar. 

While Chittorgarh's Rawatbhata and Bhaisrodgarh also have colonies of Vultures. Throughout the upstream of Jawahar Sagar you can watch vultures either resting in the cliffs or feeding their chicks.

As the sun rises and air starts to fill with warm air one by one they leave their nest and soar high and high into the skies. 

During Wintery a Migratory season cousins of Indian Vulture, the Eurasian and Himalayan Griffons visits these places. MHTR is the only place in Rajasthan where you can watch vultures while taking a boat ride. 

Bundi along with Baran has also good number of Vultures, Forest of Shahbaad of Baran District is also vulture habitat.

Meanwhile White Rumped and King or Red headed vultures are quite rare, all vultures found here are categorised as Critically Endangered while Egyptian Vulture is categorised as Endangered.

Though slowly and gradually their numbers are increasing after ban on the drug known as diclofenac which earlier proved fatal for vultures.

Still there is a need to develop a serious conservation action plan for vultures, if we want them to see soaring high in future.


Friday, September 03, 2021

Has Ustad's behaviour Changed in Captivity ?

Has Ustad's behaviour Changed in Captivity ?


Udaipur, 3 Sept :  On asking  Has T-24 Ustad's behavior Changed in Captivity? 

"It's a million dollar question as nobody at least we don't it's answer but we are quite sure that something has changed. Said some authorities from Sajjangarh Biological Park on non disclosure of name.  

Ustad was 9 year old when he was shifted to Sajjangarh Biological Park after he has been alleged of killing four people at Ranthambhore National Park. Now he is more than 15 years old.

Ustad has been kept in a non display area of the bio-park where tourist can't see him only authorised Forest Staff and Veterinary Doctors and his caretaker are allowed to go to the holding area.

Ustad (means Master) was one of the very majestic and famous Tiger of Ranthambhore, because of his bulky appearance he probably got his nick name, his captivity led National as well as international agitation by Wildlife Lovers.

Sources told that earlier T-24 aka Ustad was quite aggressive when he was shifted to Sajjangarh Biological Park. But slowly and gradually he got familiar with his caretaker.

Now when the caretaker calls his name he responds to it, he knows that his caretaker is calling and recognises him. Still if anyone new comes to that area is simply greeted by an angry roar of Ustad.

His food menu is still soup and minced meat due to his digestive problem, but he is very active fit and fine said the sources.

Ustad was brought to the Bio-park on 16th May 2015, he was operated on 4th Dec 2015, since then Ustad is taking a specialized diet and care. 

On several occasions there were rumours that Ustad will be released and get shifted to a larger enclosure, but all vain, till now No decision has been taken for Ustad's release while he getting older making it more difficult to shift a tiger of old age. 

It seems he will Stay inside the Same Park until he will take his last breath, thanks to some so called local politicians and hotel lobby and their pressure Ustad is under lifetime imprisonment, said some wildlife lovers. 

The current situation intimates that, It will be only a dream of some wildlife lovers that Ustad can still be released. 

Long Live Ustad... His Legacy continues from Sultan (still missing) to his cubs T-117 (female) and T-118 (female) and their little cubs.

Friday, August 20, 2021

Kailadevi flourishing with Tigers, Receives Prestigious Machhli Award

Kailadevi flourishing with Tigers, Receives Prestigious Machhli Award



Karauli, 20 Aug: Kailadevi Phase II of Ranthambhore Tiger Project is flourishing with Tigers. Now there are 8 Tigers although 2 Tigers are missing since long time. 

T-80 (Toofan) Male along with T-118 (Female) with 2 cubs are in Kailadevi area while T-116 (Male) along with T-117(Female) and 2 cubs are in Sarmathura area of Dhaulpur.

Famous Tiger T-72 Sultan (Male) and T-92 Sundari (Female) is missing from the area since very long the monitoring team is regularly conducting search and combing operation though. 

Meanwhile process of voluntary relocation is also going on, Kailadevi has 44 villages from which 1 village is completely relocated process of 3-4 villages is under process as per DCF Ramanand Bhakar DCF Wildlife Karauli.

Recently the tracking and monitoring team of Kailadevi got awarded with Machhli Award worth 1 lakh rupees by WWF India and Prabha Khaitan Foundation. 

Meanwhile Kailadevi is flourishing with tigers, constant and serious monitoring is the key. 

Team awarded for exemplary work includes Range officer Kailadevi Lakhan Singh, Asst. Forester Umesh Jat, Forest Guard Rahir and Rambeer Gurjar.

Machhli Award is renowned and prestigious Award on the name of Machhli the Famous Tigress of Ranthambhore given in the State for exemplary work in wildlife conservation.