Wednesday, May 11, 2022

पर्यटक गाइड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 25 मई तक इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करें।

पर्यटक गाइड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 25 मई तक इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करें।

पर्यटक गाइड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 25 मई तक इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करें।



राजस्थान पर्यटन व्यवसाय सुकरकरण और विनियमन अधिनियम, 2010 की धारा 8 की उप धारा (1) के अनुसार गाइडों के अनुज्ञापन के लिए जारी राजस्थान पर्यटन व्यवसाय नियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार 5 हजार स्थानीय स्तर पर एवं एक हजार राज्य स्तर के पर्यटक गाइडों के चयन के लिए आयोजित की जाने वाली गाइड शिक्षण पाठयक्रम में प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए इच्छुक आवेदकों से 25 मई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं।

पर्यटक स्वागत केंद्र सवाई माधोपुर के सहायक निदेशक मधुसूदन ने बताया कि राज्य स्तर गाइड शिक्षण के लिए निर्धारित एक हजार सीटों के लिए वे अभ्यर्थी जिन्होंने अपनी आयु एक अप्रैल 2022 को 21 वर्ष पूर्ण कर ली हो और 50 वर्ष की आयु से कम हो एवं भारत के विधि द्वारा स्थापति किसी विशविद्यालय से स्नातक या भारत में विधि द्वारा स्थापित किसी विशविद्यालय या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए अनुमोदित किसी संस्था से पर्यटन में 3  वर्ष डिप्लोमा धारक हो।



इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर गाइड प्रशिक्षण के लिए निर्धारित पांच हजार सीटों के लिए जिन अभ्यर्थियों ने एक अप्रैल 2022 को 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो और 50 वर्ष की आयु से कम हो परन्तु 10 वर्ष का गाइड का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों की ऊपरी आयु सीमा 55 वर्ष तक हो सकती है। अभ्यर्थी भारत में विधि द्वारा स्थापित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सैकेण्डरी परीक्षा या 10वीं परीक्षा उत्तीर्ण हो यदि किसी के पास 10 वर्ष से अधिक की गाइडिंग का अनुभव है और वह वन विभाग/पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग/अन्य सरकारी उपक्रम/विभाग या निजी न्यासों द्वारा चलाये जा रहे ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों द्वारा जारी परिचय-पत्र/अनुज्ञप्ति कार्ड रखता है तो ऐसे अभ्यर्थी को सैकण्डरी परीक्षा या 10वीं उत्तीर्ण की अर्हता में शिथिलन देय होगा।

आवेदन कैसे करेः- अभ्यर्थी अपना आवेदन www.tourism.rajasthan.gov.in तथा https://www.ihmjaipur.com वेबसाइट पर दिये गये लिंक https://www.rajguidetraining2022.in के माध्यम से ऑनलाइन भर सकते हैं।

आवेदन शुल्कः- पर्यटक स्वागत केन्द्र के सहायक निदेशक ने बताया कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 500 रूपए, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 250 रूपए, दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आवेदन करने वाले आवेदकों को क्रमश एक हजार रूपए (सामान्य वर्ग) एवं 500 रूपए (आरक्षित वर्ग) के लिए आवेदन शुल्क देय होगा।

Saturday, April 30, 2022

Shri Seduram Yadav (IFS) took charge of the post of Chief Conservator of Forests and Regional Director Ranthambore Tiger Project-

Shri Seduram Yadav (IFS) took charge of the post of Chief Conservator of Forests and Regional Director Ranthambore Tiger Project-

Shri Seduram Yadav (IFS) took charge of the post of Chief Conservator of Forests and Regional Director Ranthambore Tiger Project-

From the post of Chief
Conservator of For
ests and Regional Director Ranthambore
Tiger Project, Shri
T.C. Verma ji retired today and in his place Shri Seduram Yadav ji (IFS) took
additional charge. After after charging..

Photo;- T.C. Verma (IFS) & Shri Seduram Yadav ji (IFS)

the secretary of the Pathik lok
seva samiti, Mukesh Siit, and the members of the organization Virendra Jain,
Salman Rangrej etc. welcomed and greeted them by wearing garlands and giving

mementos
.



 




On this occasion, Chief
Conservator of Forest Forest Department (ccf) Kota Shri Manoj Parasar ji,
Deputy Conservator of Forest RTR Shri Mahendra Sharma ji, DFO Forest Department
Shri Jairam Pandey ji, DFO Chambal Ghariyal Shri Anil Yadav ji, Deputy
Conservator of Forest Tourism Shri Sandeep Chaudhary ji, Deputy Conservator of
Forests Shri Sanjeev Sharma ji etc. were present.

Secretary of the Pathik lok seva samiti, Mukesh Siit & Shri Seduram Yadav (IFS) 

Wednesday, September 15, 2021

वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच संघर्ष को रोकने में बनेगी मददगार पुस्तक प्रकाशित

वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच संघर्ष को रोकने में बनेगी मददगार पुस्तक प्रकाशित



उदयपुर, 15 सितंबर। वर्तमान में वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच बढ़ रहे संघर्ष एवं आये दिन हो रही घटनाओं को देखते हुए वन्यजीवों के उचित संरक्षण के साथ उन्हें उपयुक्त व अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ‘वन्यप्राणी बचाव एवं पुनर्वास‘ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी गई है। यह पुस्तक उदयपुर के ख्यातनाम पर्यावरणविद् एवं वन विभाग के सेवानिवृत अधिकारी डॉ.सतीश कुमार शर्मा ने लिखी है।

डॉ शर्मा के अनुसार प्राकृतिक आवासों में तरह-तरह के मानवीय व्यवधान कई जगह वन्य प्राणियों को अपना प्राकृतिक आवास छोड़कर भटकने पर मजबूर कर रहे हैं। भटकते ये प्राणी कई बार मानवीय आबादियों, खेतों, सड़कों, रेलवे लाइनों, औद्योगिक परिसरों आदि विषम जगहों पर पहुंच जाते हैं तथा कई बार वहां किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो कई बार स्वयं दुर्घटना का कारण भी बन जाते हैं। 

इन परिस्थितियों में जनधन की हानि रोकने एवं वन्य प्राणियों को संकट से निकालने हेतु त्वरित बचाव एवं पुनर्वास कार्यों की जिम्मेदारी वन विभाग पर आ जाती है। उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए इस जिम्मेदारी को कुशलता से शीघ्रता एवं सुरक्षा पूर्वक पूर्ण करने की व्यावहारिक विधियों की विस्तृत जानकारी इस पुस्तक में समाहित है जो वन विभाग एवं वन्य प्राणी सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थाओं की क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

वन्यजीवों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए उपयोगी
विश्व प्रकृति निधि भारत के सीईओ रवि सिंह ने इस पुस्तक का आमुख लिखते  हुए इसे वन्यजीव संरक्षण एवं वन्यजीवों के पुनर्वास के लिए उपयोगी बताया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों को उनके व्यवहार के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है तभी मानव एवं वन्यजीवों के बीच संघर्ष को समाप्त किया जा सकता है।

119 रियल रेसक्यू के अनुभव शामिल
डॉ सतीश शर्मा ने बताया कि इस पुस्तक में 119 वास्तविक रेस्क्यू ऑपरेशन के अनुभव को भी स्थान दिया गया है। इसके तहत चिडि़या घरों के 13, स्तनधारियों के 32, पैंथर के 34, टाइगर के 8,  पक्षियों के 9, सरीसृपों  के 23 रेस्क्यू ऑपरेशन का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि इन रेस्क्यू ऑपरेशन में किस तरह की सावधानियां बरती जानी चाहिए।




36 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव

डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने वन विभाग राजस्थान में 36 वर्षों से अधिक राजकीय सेवा प्रदान की है। इस दौरान श्रेष्ठ अनुसंधान, लेखन, वानिकी विकास एवं वन्य जीव संरक्षण प्रबंधन कार्यों पर डॉ गोरख प्रसाद पुरस्कार 1986, अखिल भारतीय वानिकी पुरस्कार 1990, वन पालक पुरस्कार 1995, वानिकी लेखन पुरस्कार 1996, विज्ञान वाचस्पति 1997, डॉ. सलीम अली वन्यजीव राष्ट्रीय फेलोशिप 1997, इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्षमित्र पुरस्कार 1998, मेदिनी पुरस्कार 1999 व 2006, इंडियन फॉरेस्ट अवॉर्ड 1999, डॉ. रतन कुमारी पदक 2000, राजस्थान सिविल सेवा पुरस्कार 2013 मिर्जा राजा राम सिंह पुरस्कार 2014, सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ माइंस एण्ड रिसर्च उदयपुर द्वारा प्रदत लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2019, जाइश वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन अवॉर्ड 2019, टाइगर वॉच सवाई माधोपुर द्वारा प्रदत ‘‘द सुजान राजस्थान लाइफ टाइम वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन अवॉर्ड 2020 आदि प्राप्त हुए।

डॉ. शर्मा ‘‘आर्निथोबॉटनी ऑफ इंडियन वीवर बर्ड‘‘, ‘‘लोक प्राणी विज्ञान‘‘, ‘‘वन्यजीव प्रबंधन‘‘, ‘‘आर्किड्स ऑफ डेजर्ट एण्ड सेमी एरिड बायोजियोग्राफिक जोन्स ऑफ इंडिया‘‘, ‘‘वन्य प्राणी प्रबंधन एवं पशु चिकित्सक‘‘, ‘‘फौनल एण्ड फलोरल एंडेमिन्स इन राजस्थान‘‘, ‘‘ट्रेडीशनल टैक्निक्स यूज्ड टू प्रोजेक्ट फॉर्म एंड फॉरेस्ट्स इन इंडिया‘‘, ‘‘वन विकास एवं पारिस्थितिकी‘‘ वन पौधशालारू स्थापना एवं प्रबंधन‘‘  एवं ‘‘जैव विविधता संरक्षण‘‘ नामक पुस्तकों के प्रणेता रहे। इनके 640 से अधिक लोकप्रिय एवं वैज्ञानिक लेख हिन्दी व अंग्रेजी भाषा के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अनुसंधान journal में प्रकाशित हो चुके है।

Saturday, July 24, 2021

Feasibility Assessment committe set up by NTCA for Kumbhalgarh

Feasibility Assessment committe set up by NTCA for Kumbhalgarh


Jaipur, 24 July : Feasibility Assessment Committe has been set up for Kumbhalgarh to find out the possibilities that how the Wildlife Sanctuary can be upgraded to Tiger Reserve.

NTCA's Deputy Inspector General of Forest Sonali Ghosh on the recommendation of Diya Kumari MP from Rajsamand had set up a 3 member and 1 convenor committee. 

The committe includes :

  1. R.N. Mehrotra IFS (retd.) Member
  2. N.K. Vasu IFS (retd.) Member
  3. Kaushik Banerjee P.hd Scientist Tiger cell WII Member
  4. Hemant Kamdi AIG, NTCA as Member Convenor
Diya Kumari also raised the issue of Kumbhalgarh to be developed as tiger reserve in Loksabha also.