Monday, July 25, 2022

The Organization Pathik lok seva samiti started the plantation campaign

The Organization Pathik lok seva samiti started the plantation campaign

The organization Pathik lok seva samiti started the plantation campaign-


Pathik Lok Seva Samiti, an organization working at the grassroots level on environment, forest and wildlife conservation in the district sawai madhopur, like every year, this year also started a tree plantation campaign in the interest of making people aware for environmental protection.  



On the first day of the campaign,  organization members Sapna Jolia, Anjali Jolia and Surendra planted 15 shade and flower plants in the Step by Step Secondary School, school children, staff and school founder Arvind Kumar Singhal planted saplings for the present school children.The  organization secretary Mukesh SIIT explained in detail about the importance and importance of medicinal plants in human life.


After that, in the newly constructed garden located in the Girls College Sawai Madhopur, the members of the organization along with the college principal Manisha Sharma, Professor Dr. Aarti Bhadauria, Professor Rajesh Meena, etc. planted 20 shady and flowering plants.  


At the behest of the college principal, the girls' college garden will be cleaned by the  organization, along with more than 100 flowers and shade plants will be planted in the garden.


Every year, along with planting and distributing 1000 saplings in villages, temples, mosques, schools, colleges and public places around Sawai Madhopur, it also works to make people and school and college students aware of conservation.





Saturday, June 25, 2022

रणथम्भोर आगमन पर राजस्थान वन विभाग के मुखिया का किया स्वागत।

रणथम्भोर आगमन पर राजस्थान वन विभाग के मुखिया का किया स्वागत।

 रणथम्भोर आगमन पर राजस्थान वन विभाग के मुखिया हॉफ डॉ. डीएन पांडे जी का आज संस्था पथिक लोक सेवा समिति के सचिव मुकेश सीट, संस्था सदस्य सपना, अंजली, ललित, टिया,  सुरेंद्र आदि ने फोरेस्ट गेस्ट हाउस में जाकर मुलाकात कर त्रिनेत्र गणेश जी महाराज की तस्वीर भेंट की ओर हॉफ साहब को जिले के चौथ का बरवाड़ा से भगवतगढ़ व बोली आदि वन विभाग के क्षेत्र में आने वाले पहाड़ी इलाको में हाइना, जैकाल, लेपर्ड, लोमड़ी वन्यजीवो का विचरण रहता है इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां चालू करने का आग्रह किया जिससे जिले के लोगो को रोजगार के अवसर प्रदान होंगे।

 file photo
                             


Sunday, May 22, 2022

अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर उपवन संरक्षक वन विभाग सवाई माधोपुर व पथिक लोक सेवा समिति के सयुंक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया

अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर उपवन संरक्षक वन विभाग सवाई माधोपुर व पथिक लोक सेवा समिति के सयुंक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया

आज अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर उपवन संरक्षक वन विभाग सवाई माधोपुर व पथिक लोक सेवा समिति के सयुंक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया।




कार्यक्रम की सुरुवात जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ऑला द्वारा जिला कलेक्ट्री परिसर में से रैली को हरी झंडी दिखा कर की गई, रैली बजरिया मैंन मार्केट में से होती हुई महावीर पार्क  में पहुची, पार्क में विभाग व संस्था द्वारा जूनियर व सीनियर वर्ग के स्कूल व कॉलेज के बच्चों की पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला प्रमुख श्रीमती सुदामा मीना, अध्यक्षता नगरपरिषद चैयरमैन विमल महावर विशिष्ट अतिथि उपवन संरक्षक जयराम पांडेय, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डिग्गी प्रसाद मीना व अतिथि संस्था सचिव मुकेश सीट, वन अधिनस्थ कर्मचारी संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जादौन , राजकीय पीजी कॉलेज के व्याख्याता रामलाल बैरवा, अध्यापिका श्रीमती विजयलक्ष्मी अग्रवाल, सेनानिवर्त फौजी हुसेन खान, सेवादल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सलमान रंगरेज, रणथम्भोर स्कूल आर्ट के एम डी परासर व वन विभाग से रेंजर सुरेश गुर्जर, फोरेस्टर ताराचंद व संस्था सदस्य भवानी शंकर, सन्नी वर्मा, ऋषि मीना, सपना जोलिया, सविता शर्मा के अलावा वन कर्मचारी स्कूल के बच्चे व संस्था सदस्य व आमजन मौजूद रहे।



इस अवसर कार्यक्रम का मंच संचालन वन अधीनस्थ कर्मचारी संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र जादौन ने किया। सभी अतिथियों का स्वागत वन अधिकारीयों व संस्था सदस्यो द्वारा किया गया। 


कार्यक्रम की सुरुवात करते हुवे संस्था सचिव मुकेश सीट ने कर्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों,विद्यार्थियों, संस्था सदस्यो व वन कर्मचारियों का स्वागत करते हुवे पर्यावरण संरक्षण के अलावा वन्यजीवो के संरक्षण करने में सभी को धरातल पर योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम में कॉलेज के व्यख्याता राम बैरवा ने जैव विविधता के बारे में संक्षिप्त में जानकारी दी साथ ही युवाओं को ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण के संरक्षण में अपनी अहम जिमेदारी निभाने की अपील की, मुख्य अथिति जिला प्रमुख ने ओर कार्येक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर परिषद चेयरमैन ने ऐसे आयोजन जिले में होते रहे चाहिए इस कार्यक्रम के आयोजक वन विभाग और संस्था को धन्येवाद दिया। और सभी को प्रकति ओर जीव जंतुओं का संरक्षण करने की अपील की, उप वन संरक्षक जयराम पांडे जी ने मानव जीवन मे जैव विविधता को समझते हुवे विस्तार पूर्वक समझाया छोटे बड़े जीवो की कई प्रकार की प्रजातियां होती है जिनका पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, ऑक्सिजन, ग्लोबलवार्मिंग आदि में जैव विविधता के महत्त्व बारे में बताया। मानव जीवन को बचाने के लिए जैव विविधता का संरक्षण करना अति आवश्यक हो गया है।

 
                               

पोस्टर प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में पीजी कॉलेज की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा प्रतिभा गुप्ता द्वितीय स्थान व प्रीति खनगवार प्रथम स्थान ओर जूनियर वर्ग में प्रथम स्थान पर स्टेप बाई स्टेप स्कूल के चिन्मय शर्मा, द्वितीय स्थान शिवांक गुप्ता व तृतीय स्थान कशिश मंगल सिनियर सेकेंड्री कुतलपुरा जाटान रही। सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरुस्कार दिया गया साथ ही रैली में सम्मलित होने वाले सभी विद्यार्थियों व संस्था सदस्यों को भी सांत्वना पुरस्कार दिए गए।




कार्यक्रम के अंत जिला प्रमुख व नगर परिषद चेयरमैन, उप वन संरक्षक संस्था सदस्यों द्वारा संस्था पथिक लोक सेवा समिति का "पक्षी बचाओ परिंडा लगाओ अभियान" की शुरुआत पार्क में परिंडा लगाकर की गई।






Sunday, May 15, 2022

रणथम्भोर बाघ परियोजना के बदलाव की कहानी है-

रणथम्भोर बाघ परियोजना के बदलाव की कहानी है-

रणथंभौर की विभागिय टीम द्वारा बाघो व अन्य वन्यजीवो के संरक्षण मे इस वर्ष बेहतरीन कार्ये किये गए-

रणथम्भोर बाघ परियोजना के बदलाव की कहानी है-

पहली बार टाइगर रिजर्व में पानी के व्याप्त व्यवस्थाओ के ये सोलर की व्याप्त व्यवस्था, टाइगर प्रोटेक्शन व कंजर्वेशन के लिए 9 चौकियां ओर बॉडर होमगार्ड्स की व्यवस्था आदि के काम होते दिख रहे है और इनके अलावा किसी भी टाइगर रिजर्व के लिए सब से अहम जरूरी होती है उसकी जीवन रेखा, पेराफेरी प्रोटेक्शन रोड व रोज टाइगर की रिपोर्टिंग । 


जिस कोर एरिया में सर्वाधिक बाघ हैं और जहां से लगातार बाघ गायब होने की घटनाएं होती रही है वहा की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रोटक्शन रॉड बनाई गई और सभी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। स्टाफ के रहने के लिए बेहतरीन सुविधाओं युक्त चौकिया बनाई गई है कुछ एक का निमार्ण कार्ये प्रगर्ति पर है। 



अवैध घुसपैठ पर अंकुश लगता देख कुछ एक छोटे मोटे व्यवधान उत्तपन्न हुवे जिसे कुछ निर्माणाधीन काम रुक गए तो कुछ पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कर पुलिस सुरक्षा के बीच कामो को पूरा किया जा रहा हैं।


4 सर्वाधिक बाघ व अन्य वन्यजीवो वाली रेंजों में 70 कि.मि पेट्रोलिंग ट्रैक  व 12 चोकिया बनाई गई हैं। पहले इन पेरिफेरी पर सुरक्षा का कोई पुख़्ता बंदोबस्त नही था ना चौकीयो का तो नामोनिशान था और ना ही स्टाफ को गश्त करने के किसी प्रकार का कोई ट्रेक था। 

इसलिए पहले सुरक्षा दीवार के पेरिफेरी के रास्तों से अवैध गतिविधियां, अवैध घुसपैठ व शिकार जैसी कहि घटनाएं घटित होती रही थी। कभी कबार विभाग को सूचना लगती थी तो विभाग के वन कर्मियों के पास जंगल के बीच से होकर उन तक पहुंचने के रास्ते नहीं मिलते थे। 


मिर्जाघाटी एरिया में  वर्ष 2021 दिसम्बर माह में एक चिंकारा के शिकार की घटना हुई थी जिसमे शिकारी चिंकारा को मारकर ले जा रहे थे। जब तक विभाग के वन कर्मियों की टीम फेरफेरी से बाहर आबादी वाले एरिया से मोके पर पहुची तब तक शिकारी भाग चुके थे। इसे पहले भी बंदूकधारी शिकारी चीतल के कटे धड़ को ले जाते हुए ट्रैप कैमरे में दिखाई दिए थे, हर बार जीवन रेखा सड़क, पर्याप्त चौकिया, व स्टाफ के अभाव में यही होता रहा है शिकारी शिकार कर के हमेशा गायब हो जाता था क्योंकि जंगल में 15-20 किलोमीटर भीतर के पीएफेरी में  घुसपैठ रोकने के लिए कोई स्टाफ, चौकी, रास्ते मौजूद नहीं थे। 


हाल ही में किये गये सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के कार्यों को ओर आगे बढ़ाते हुवे सवाई मानसिंह अभ्यारण फलौदी वाले 636 वर्ग कि.मी तक ले जाना है।


जिससे टाइगर ओर अन्य वन्यजीवो को एक बड़ा एरिया मिलेगा, साथ ही अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण होने से पेरिफैरी एरिया में फिर से हरा भरा जंगल डवलप होगा ओर सभी प्रकार की अवैध घटनाएं रूकेंगे।

Thursday, May 05, 2022

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) का किया गया स्वागत

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) का किया गया स्वागत

संस्था पथिक लोक सेवा समिति द्वारा जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) का किया गया स्वागत

सवाई माधोपुर, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) एमएल मीना का सवाई माधोपुर से गुजरात प्रदेश मुख्यालय   पर स्थानांतरित होने पर सिटी सेंटर में स्थित पथिक लोक सेवा समिति कार्यालय में विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

Photo- NGO office


कार्यक्रम में जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) एमएल मीना को संस्था सदस्यों द्वारा माला एवं साफा पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया गया। 




इस अवसर पर उन्होंने नाबार्ड द्वारा किए जाने वाले कई कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नाबार्ड के द्वारा महिला एवं पुरुषों को कई प्रकार की योजनाओं की जानकारी एवं उनकी ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के बाद लोग स्वयं का रोजगार भी खोल सकते हैं। इसकी वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। साथ ही उन्होंने संस्था सद्स्यों से अपील करते हुए कहा आज का युवा वर्ग नौकरी की तलाश में रहता है। नौकरी नहीं मिलने पर अवसाद में रहता है ऐसे में लोगों को नाबार्ड द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग लेकर स्वयं का रोजगार चलाने की कोशिश करना चाहिए।


इस मौके पर एमएल मीना की जगह डीडीएम पद पर पदस्थापित हुए पुनीत शर्मा का भी संस्था सदस्यों द्वारा स्वागत किया गया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि नाबार्ड से संबंधित जो भी योजनाएं हैं उनकी जानकारी जन जन को होनी चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा हो सके। 




इस मौके पर उन्होंने एवं सभी संस्था सदस्यों ने एक दूसरे का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्था सचिव मुकेश सीट, संस्था सदस्य विजय मीना, रेखा मीना, अब्दुल गफ्फार, सनी वर्मा, शिवानी राणावत, सपना जोलिया, टीना, भारती राही, विशाल , विरेन जैन, जय लक्ष्मी कुमावत सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।


Thursday, April 21, 2022

 वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले का किया विरोध -

वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले का किया विरोध -


 वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले का किया विरोध 

सवाई माधोपुर- रणथम्भौर में वनपाल का तबादले का मामला विवादों के घेरे में आ रहा है। राजस्थान वन अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ ने वनपाल के तबादले पर नाराजगी जताते हुए निन्दा की है। रणथम्भौर के कुण्डेरा रेंज के भदलाव नाके पर मुकेष गुर्जर वनपाल के पद पर कार्यरत थे। पिछले दिनों उनका तबादला कर उन्हें फलाइंग रेंज में लगाया गया। इसको लेकर वन कर्मचारी संघ के प्रदेष अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह जादौन का कहना हैं कि अवैध खनन पर कार्यवाही करना लोकसेवक का फर्ज है। जबकि एक राजनेता ने वनपाल का तबादला करवा दिया। पहले षिकायत की जांच करानी चाहिए। 


Thursday, April 14, 2022

 रणथम्भौर के बाघ करौली और बूंदी की तरफ बढ़ते हुए

रणथम्भौर के बाघ करौली और बूंदी की तरफ बढ़ते हुए

 रणथम्भौर के बाघ करौली और बूंदी की तरफ बढ़ते हुए 

सवाई माधोपुर-रणथम्भौर में बाघों का कुनबा बढ़ने के साथ ही बाघों के लिए विचरण क्षेत्र कम पड़ने लगा है। ऐसे में आए दिन रणथम्भौर में बाघों के बीच संघर्ष के मामले सामने आते रहते हैं। खुद वन विभाग यह मान चुका है कि वर्तमान में रणथम्भौर में क्षमता से अधित बाघ-बाघिन विचरण कर रहे है। रणथम्भौर में करीब 50 व्यस्क बाघों की जगह है, लेकिन यहां वर्तमान में 60 से अधिक वयस्क बाघ-बाघिन विचरण कर रहे हैं। टेरेटरी की तलाष में बाघ-बाघिन इधर उधर भटक रहे हैं। कई बाघ बिल्कुल रणथम्भौर की सीमा तक पहुंच चुके हैं। अब ये करौली और बूंदी के जंगलों में पहुंच सकते हैं। 

वन विभाग के अनुसार रणथम्भौर की बाघिन टी-8 की संतान बाघ-टी-129, जिसका पूर्व में कुण्डाल वन क्षेत्र के पोलघटा इलाके में विचरण कर रहा है। पोलघटा इलाके में बाघ के पगमार्क भी मिल रहे है। ऐसे में बाघ और आगे बढ़ा और बाघ ने चाकल नदी को पार किया तो यह बाघ रणथम्भौर से निकलकर बूंदी के जंगलों में पहुंच जाएगा। इस रास्ते से बाघ रामगढ विषधारी अभ्यारण तक जा सकता है। 



वहीं रणथम्भौर में बाघों के एक बार फिर करौली और बूंदी के बाॅर्डर पर पहुंचने से वन विभाग भी अलर्ट मोड पर है। वन विभाग की ओर से बाघों की लगातार माॅनिटरिंग कराई जा रही है। इसके लिए विभाग की ओर से सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। 

वहीं बात करें बाघिन टी-102 के युवा शावक भी अब टेरेटरी की तलाश कर रहे हैं। आघिन टी-102 के एक शावक ने तो टेरेटरी की तलाश में करीब-करीब करौली की तरफ अपना रूख कर लिया है। यह बाघ रणथम्भौर के भूरीपहाड़ी इलाके में पहुंच  चुका है। ऐसे में यदि बाघ ने बनास नदी को पार किया तो यह बाघ करौली के कैलादेवी अभ्यारण तक पहुंच  सकता है। पहले भी इसी मार्ग से पूर्व मेें रणथम्भौर का खूंखार बाघ टी-104 भी करौली पहुंच चुका है। 

वहीं इस पूरे मामले पर सवाई माधोपुर रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक महेन्द्र शर्मा के अनुसार रणथम्भौर में बाघों की संख्या अधिक होने की वजह से कई बाघ टेरेटरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। बाघ टी-129 व टी-102 का षावक रणथम्भौर के बाॅर्डर तक पहुंच गए हैं। यदि यह बाघ आगे बढ़े और इन्होंने नदी पार की तो ये बूंदी व करौली पहुंच सकते हैं। हमारी ओर से लगातार माॅनिटरिंग कराई जा रही है।  


Wednesday, September 15, 2021

वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच संघर्ष को रोकने में बनेगी मददगार पुस्तक प्रकाशित

वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच संघर्ष को रोकने में बनेगी मददगार पुस्तक प्रकाशित



उदयपुर, 15 सितंबर। वर्तमान में वन्यजीवों एवं मानव प्रजाति के बीच बढ़ रहे संघर्ष एवं आये दिन हो रही घटनाओं को देखते हुए वन्यजीवों के उचित संरक्षण के साथ उन्हें उपयुक्त व अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ‘वन्यप्राणी बचाव एवं पुनर्वास‘ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी गई है। यह पुस्तक उदयपुर के ख्यातनाम पर्यावरणविद् एवं वन विभाग के सेवानिवृत अधिकारी डॉ.सतीश कुमार शर्मा ने लिखी है।

डॉ शर्मा के अनुसार प्राकृतिक आवासों में तरह-तरह के मानवीय व्यवधान कई जगह वन्य प्राणियों को अपना प्राकृतिक आवास छोड़कर भटकने पर मजबूर कर रहे हैं। भटकते ये प्राणी कई बार मानवीय आबादियों, खेतों, सड़कों, रेलवे लाइनों, औद्योगिक परिसरों आदि विषम जगहों पर पहुंच जाते हैं तथा कई बार वहां किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो कई बार स्वयं दुर्घटना का कारण भी बन जाते हैं। 

इन परिस्थितियों में जनधन की हानि रोकने एवं वन्य प्राणियों को संकट से निकालने हेतु त्वरित बचाव एवं पुनर्वास कार्यों की जिम्मेदारी वन विभाग पर आ जाती है। उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए इस जिम्मेदारी को कुशलता से शीघ्रता एवं सुरक्षा पूर्वक पूर्ण करने की व्यावहारिक विधियों की विस्तृत जानकारी इस पुस्तक में समाहित है जो वन विभाग एवं वन्य प्राणी सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थाओं की क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

वन्यजीवों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए उपयोगी
विश्व प्रकृति निधि भारत के सीईओ रवि सिंह ने इस पुस्तक का आमुख लिखते  हुए इसे वन्यजीव संरक्षण एवं वन्यजीवों के पुनर्वास के लिए उपयोगी बताया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों को उनके व्यवहार के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है तभी मानव एवं वन्यजीवों के बीच संघर्ष को समाप्त किया जा सकता है।

119 रियल रेसक्यू के अनुभव शामिल
डॉ सतीश शर्मा ने बताया कि इस पुस्तक में 119 वास्तविक रेस्क्यू ऑपरेशन के अनुभव को भी स्थान दिया गया है। इसके तहत चिडि़या घरों के 13, स्तनधारियों के 32, पैंथर के 34, टाइगर के 8,  पक्षियों के 9, सरीसृपों  के 23 रेस्क्यू ऑपरेशन का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि इन रेस्क्यू ऑपरेशन में किस तरह की सावधानियां बरती जानी चाहिए।




36 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव

डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने वन विभाग राजस्थान में 36 वर्षों से अधिक राजकीय सेवा प्रदान की है। इस दौरान श्रेष्ठ अनुसंधान, लेखन, वानिकी विकास एवं वन्य जीव संरक्षण प्रबंधन कार्यों पर डॉ गोरख प्रसाद पुरस्कार 1986, अखिल भारतीय वानिकी पुरस्कार 1990, वन पालक पुरस्कार 1995, वानिकी लेखन पुरस्कार 1996, विज्ञान वाचस्पति 1997, डॉ. सलीम अली वन्यजीव राष्ट्रीय फेलोशिप 1997, इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्षमित्र पुरस्कार 1998, मेदिनी पुरस्कार 1999 व 2006, इंडियन फॉरेस्ट अवॉर्ड 1999, डॉ. रतन कुमारी पदक 2000, राजस्थान सिविल सेवा पुरस्कार 2013 मिर्जा राजा राम सिंह पुरस्कार 2014, सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ माइंस एण्ड रिसर्च उदयपुर द्वारा प्रदत लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2019, जाइश वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन अवॉर्ड 2019, टाइगर वॉच सवाई माधोपुर द्वारा प्रदत ‘‘द सुजान राजस्थान लाइफ टाइम वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन अवॉर्ड 2020 आदि प्राप्त हुए।

डॉ. शर्मा ‘‘आर्निथोबॉटनी ऑफ इंडियन वीवर बर्ड‘‘, ‘‘लोक प्राणी विज्ञान‘‘, ‘‘वन्यजीव प्रबंधन‘‘, ‘‘आर्किड्स ऑफ डेजर्ट एण्ड सेमी एरिड बायोजियोग्राफिक जोन्स ऑफ इंडिया‘‘, ‘‘वन्य प्राणी प्रबंधन एवं पशु चिकित्सक‘‘, ‘‘फौनल एण्ड फलोरल एंडेमिन्स इन राजस्थान‘‘, ‘‘ट्रेडीशनल टैक्निक्स यूज्ड टू प्रोजेक्ट फॉर्म एंड फॉरेस्ट्स इन इंडिया‘‘, ‘‘वन विकास एवं पारिस्थितिकी‘‘ वन पौधशालारू स्थापना एवं प्रबंधन‘‘  एवं ‘‘जैव विविधता संरक्षण‘‘ नामक पुस्तकों के प्रणेता रहे। इनके 640 से अधिक लोकप्रिय एवं वैज्ञानिक लेख हिन्दी व अंग्रेजी भाषा के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अनुसंधान journal में प्रकाशित हो चुके है।